आगर मालवा। जिले में किसानों की तबाह फसलों को लेकर अब बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। सुसनेर क्षेत्र के पूर्व भाजपा विधायक मुरलीधर पाटीदार की एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद प्रशासनिक लापरवाही का ऐसा मामला उजागर हुआ है, जिसने हजारों किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। अब कांग्रेस विधायक भेरू सिंह परिहार बापू भी इस मुद्दे पर खुलकर मैदान में उतर आए हैं।
पूर्व विधायक पाटीदार ने फेसबुक पोस्ट में आरोप लगाया है कि प्रशासन ने खरीफ फसल राहत सर्वे रिपोर्ट में फसलों के वास्तविक नुकसान को “निरंक” यानी शून्य दर्शाकर भोपाल भेज दिया। जबकि हकीकत यह है कि जिले के 512 गांवों में 1.32 लाख हेक्टेयर में बोई गई सोयाबीन फसलें पिला मोजेक वायरस, कीट प्रकोप और अनियमित वर्षा से बर्बाद हो चुकी हैं।
पाटीदार ने जो आधिकारिक दस्तावेज़ साझा किए हैं, उनमें खुलासा हुआ है कि आगर, सुसनेर, नलखेड़ा, कानड़, बड़ौद और सोयतकलां तहसीलों में भारी नुकसान दर्ज होने के बावजूद सर्वे रिपोर्ट में हर जगह “निरंक” लिखा गया और राहत राशि का कॉलम खाली छोड़ दिया गया।

ग्रामीण इलाकों में किसान बर्बाद फसलों के बीच खड़े होकर अपनी नाराजगी जता रहे हैं। उनका कहना है कि सर्वे दलों ने खेतों का निरीक्षण तो किया, लेकिन वास्तविक स्थिति रिपोर्ट में नहीं दिखाई। परिणामस्वरूप, “निरंक रिपोर्ट” के कारण मुआवजा प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई है।इस खुलासे के बाद किसान संगठनों और सामाजिक संस्थाओं में आक्रोश फैल गया है।

कांग्रेस विधायक बापू ने प्रशासन पर “फर्जी सर्वे” का आरोप लगाते हुए कहा —
“यदि बीजेपी नेता किसानों का मुआवजा स्वीकृत कराते हैं तो उनका फूल-मालाओं से स्वागत करेंगे,
लेकिन अगर नहीं करा पाए तो किसान जूते-चप्पल की माला पहनाएंगे तो भी हम उनके साथ खड़े रहेंगे।”
इधर, भाजपा नेताओं की भी हलचल तेज हो गई है। आगर विधायक मधु गहलोत और जिला अध्यक्ष ओम मालवीय ने मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिखकर किसानों को आश्वासन दिया है कि सर्वे अभी पूरा नहीं हुआ है, जरूरत पड़ी तो दुबारा सर्वे कराकर मुआवजा दिलाया जाएगा।
उधर, नवागत कलेक्टर प्रीति यादव ने भी 4 अक्टूबर को पुनः सर्वे के आदेश जारी कर दिए हैं, ताकि किसानों के वास्तविक नुकसान का पुनर्मूल्यांकन कर रिपोर्ट दोबारा भोपाल भेजी जा सके।
अब सवाल यह है कि —
क्या प्रशासन इस गंभीर गलती को समय रहते सुधार पाएगा और किसानों की तकलीफें शासन तक पहुंचाएगा,
या फिर यह “निरंक रिपोर्ट” एक बार फिर किसानों को मुआवजे से वंचित रखेगी?
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले मुआवजा सूची से आगर मालवा जिला बाहर रहने पर किसानों ने नेशनल हाईवे पर चक्काजाम कर दिया था। तब प्रशासन ने ही दोबारा सर्वे की बात कही थी — लेकिन अब वही सर्वे रिपोर्ट खुद विवादों में है।








